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Saturday, 3 August 2013
Thursday, 4 July 2013
हिन्दू धर्मं के 7 प्रमुख तीर्थ स्थान
यूं तो हिन्दू धर्म के सैकड़ों तीर्थ स्थल है, लेकिन हम आपको बताना चाहते हैं कि उनमें से भी कुछ ऐसे तीर्थ स्थल हैं जो उन सैंकड़ों में शीर्ष पर है। यहां जाना सचमुच ही तीर्थ स्थल पर जाना माना जाता है। यह पुण्य स्थल है। आओ, जानते हैं कि कौंन-कौंन से तीर्थ स्थल है।
1.ब्रह्मा की नगरी पुष्कर: राजस्थान के अजमेर से उत्तर-पश्चिम में करीब 11 किलोमीटर दूर ब्रह्मा की यज्ञस्थली और ऋषियों की तपस्यास्थली तीर्थराज पुष्कर नाग पहाड़ के बीच बसा हुआ है। यहां ब्रह्माजी का विश्व का एक मात्र मंदिर है। मंदिर के पीछे रत्नागिरि पहाड़ पर ब्रह्माजी की प्रथम पत्नी सावित्री का मंदिर है। यज्ञ में शामिल नहीं किए जाने से कुपित होकर सावित्री ने केवल पुष्कर में ब्रह्माजी की पूजा किए जाने का शाप दिया था।
4. काशी विश्वनाथ : उत्तरप्रदेश में गंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित वाराणसी नगर विश्व के प्राचीनतम शहरों में से एक माना जाता है। इस नगर के हृदय में बसा है भगवान काशी विश्वनाथ का मंदिर जो शिव के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जब पृथ्वी का निर्माण हुआ था तब प्रकाश की पहली किरण काशी की धरती पर पड़ी थी। तभी से काशी ज्ञान तथा आध्यात्म का केंद्र माना जाता है।
5. श्रीराम की अयोध्या : भगवान राम की नगरी अयोध्या हजारों महापुरुषों की कर्मभूमि रही है। यह पवित्रभूमि हिन्दुओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। यहां पर भगवान राम का जन्म हुआ था। यह राम जन्मभूमि है।
6. कृष्ण की नगरी : हिन्दुओं के लिए मदीना की तरह है मथुरा। श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ था। मथुरा यमुना नदी के तट पर बसा एक सुंदर शहर है। मथुरा जिला उत्तरप्रदेश की पश्चिमी सीमा पर स्थित है। मथुरा जिले में चार तहसीलें हैं- मांट, छाता, महावन और मथुरा तथा 10 विकास खण्ड हैं- नन्दगांव, छाता, चौमुहां, गोवर्धन, मथुरा, फरह, नौहझील, मांट, राया और बल्देव हैं।
7. बुद्ध की नगरी : वैशाख माह की पूर्णिमा के दिन बुद्ध का जन्म नेपाल के लुम्बिनी में ईसा पूर्व 563 को हुआ। इसी दिन 528 ईसा पूर्व उन्होंने भारत के बोधगया में सत्य को जाना और इसी दिन वे 483 ईसा पूर्व को 80 वर्ष की उम्र में भारत के कुशीनगर में निर्वाण (मृत्यु) को उपलब्ध हुए। यह तीनों ही स्थान हिन्दू और बौद्ध के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ है।
1.ब्रह्मा की नगरी पुष्कर: राजस्थान के अजमेर से उत्तर-पश्चिम में करीब 11 किलोमीटर दूर ब्रह्मा की यज्ञस्थली और ऋषियों की तपस्यास्थली तीर्थराज पुष्कर नाग पहाड़ के बीच बसा हुआ है। यहां ब्रह्माजी का विश्व का एक मात्र मंदिर है। मंदिर के पीछे रत्नागिरि पहाड़ पर ब्रह्माजी की प्रथम पत्नी सावित्री का मंदिर है। यज्ञ में शामिल नहीं किए जाने से कुपित होकर सावित्री ने केवल पुष्कर में ब्रह्माजी की पूजा किए जाने का शाप दिया था।
2. विष्णु की नगरी बद्रीनाथ : हिन्दुओं के चार धामों में से एक बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु का निवास स्थल है। यह भारत के उत्तरांचल राज्य में अलकनंदा नदी के बाएं तट पर नर और नारायण नामक दो पर्वत श्रेणियों के बीच स्थित है। गंगा नदी की मुख्य धारा के किनारे बसा यह तीर्थस्थल हिमालय में समुद्र तल से 3,050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
3.कैलाश मानसरोवर : मानसरोवर वह पवित्र जगह है, जिसे शिव का धाम माना जाता है। मानसरोवर के पास स्थित कैलाश पर्वत पर भगवान शिव साक्षात विराजमान हैं। यह धरती का केंद्र है। यह हिन्दुओं के लिए मक्का की तरह है।
4. काशी विश्वनाथ : उत्तरप्रदेश में गंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित वाराणसी नगर विश्व के प्राचीनतम शहरों में से एक माना जाता है। इस नगर के हृदय में बसा है भगवान काशी विश्वनाथ का मंदिर जो शिव के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जब पृथ्वी का निर्माण हुआ था तब प्रकाश की पहली किरण काशी की धरती पर पड़ी थी। तभी से काशी ज्ञान तथा आध्यात्म का केंद्र माना जाता है।
5. श्रीराम की अयोध्या : भगवान राम की नगरी अयोध्या हजारों महापुरुषों की कर्मभूमि रही है। यह पवित्रभूमि हिन्दुओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। यहां पर भगवान राम का जन्म हुआ था। यह राम जन्मभूमि है।
6. कृष्ण की नगरी : हिन्दुओं के लिए मदीना की तरह है मथुरा। श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ था। मथुरा यमुना नदी के तट पर बसा एक सुंदर शहर है। मथुरा जिला उत्तरप्रदेश की पश्चिमी सीमा पर स्थित है। मथुरा जिले में चार तहसीलें हैं- मांट, छाता, महावन और मथुरा तथा 10 विकास खण्ड हैं- नन्दगांव, छाता, चौमुहां, गोवर्धन, मथुरा, फरह, नौहझील, मांट, राया और बल्देव हैं।
Wednesday, 3 July 2013
तेजेन्द्र खन्ना जी जगह जनाब नजीब जंग
नव नियुक्त उपराज्यपाल जनाब नजीब जंग दिल्ली के 20वें उपराज्यपाल बनाये गये हैं। राजधनी दिल्ली के दरियागंज क्षेत्रा में उनका जन्म 18 जनवरी 1951 में हुआ था। 62 वर्षीय जनाब नजीब जंग की प्रारम्भिक शिक्षा सेंट कोलम्बस स्कूल में हुई। सेंट स्टीपफेंस कालेज से स्नात्तक व इतिहास में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त किया। लंदन से सोशल पोलिसी में एमएससी की और वर्तमान में आक्सपफोर्ड विश्वविद्यालय से ऊर्जा अर्थशास्त्रा में शोध् कर रहे हैं।
1973 में जनाब नजीब जंग भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए चयनित हुए थे। मध्य प्रदेश कैडर के आई.ए.एस. अधिकारी के रूप में उन्होंने अपना कैरियर शुरू किया। मध्य प्रदेश के कई प्रशासनिक पदों पर रहने के बाद केन्द्र में पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव पद से 1993 में सेवानिवृत्ति ले ली।
जनाब नजीब जंग प्रारम्भ से पठन-पाठन में लगे रहे और कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पत्र- पत्रिकाओं के लिए लिखते रहे। जब वे रेलवे मंत्रालय में थे। उस वक्त दूरदर्शन पर अंग्रेजी समाचार पढ़ते पुराने कई लोगों ने उन्हें अवश्य देखा होगा। अभिनय व लेखन की शौक के बीच वर्ष 2009 सितम्बर में उन्हें जामिया मिलिया इस्लामिया का कुलपति नियुक्त किया गया और 1 जुलाई 2013 को राष्ट्रपति के अधिसूचना के साथ वे दिल्ली के 20वें उपराज्यपाल बन चुके हैं।
तेजेन्द्र खन्ना को 1996 में आई.ए.एस. से सेवानिवृत्त होते 31 दिसम्बर 1996 को दिल्ली का उपराज्यपाल बनाया गया था और वे इस पद पर 19 अप्रैल 1998 तक रहे। जब केन्द्र में पुनः कांग्रेस की सरकार आई तो 9 अप्रैल 2007 को पुनः तेजेन्द्र खन्ना को दिल्ली का उपराज्यपाल बनाया गया । छः वर्षों से लगातार तेजेन्द्र खन्ना दिल्ली के उपराज्यपाल के रूप में अपनी सेवा दे रहे थे, अब उनकी जगह जनाब नजीब जंग को मिला है और दल्ली की आवाम नवनियुक्त उपराज्यपाल से उम्मीद करती है कि वे दिल्ली की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने का करिश्मा वह अवश्य करेंगे।
Saturday, 25 May 2013
अच्छा लगता है, जब बच्चे सिखाते हैं
बच्चे, पता ही नहीं चलता है, कब बड़े हो जाते हैं? कल तक लगता था कि इन्हें अभी कितना कुछ सीखना है, साथ ही साथ हम यही सोच कर दुबले हुये जा रहे थे कि कैसे ये इतना ज्ञान समझ पायेंगे? अभी तक उनकी गतिविधियों को उत्सुकता में डूबा हुआ स्वस्थ मनोरंजन समझते रहे, सोचते रहे कि गंभीरता आने में समय लगेगा।बच्चों की शिक्षा में हम सहयोगी होते हैं, बहुधा प्रश्न हमसे ही पूछे जाते हैं। उत्सुकता एक वाहक रहती है, हम सहायक बने रहते हैं उसे जीवन्त रखने में। जैसा हमने चीज़ों को समझा, वैसा हम समझाते भी जाते हैं। बस यही लगता है कि बच्चे आगे आगे बढ़ रहे हैं और हम उनकी सहायता कर रहे हैं।
यहाँ तक तो सब सहमत होंगे, सब यही करते भी होंगे। जो सीखा है, उसे अपने बच्चों को सिखा जाना, सबके लिये आवश्यक भी है और आनन्दमयी भी। यहाँ तक तो ठीक भी है, पर यदि आपको लगता है कि आप उनकी उत्सुकता के घेरे में नहीं हैं, तो पुनर्विचार कर लीजिये। यदि आपको लगता उसकी उत्सुकता आपको नहीं भेदती है तो आप पुनर्चिन्तन कर लीजिये।
प्रश्न करना तो ठीक है, पर आपके बच्चे आपके व्यवहार पर सार्थक टिप्पणी करने लगें तो समझ लीजिये कि घर का वातावरण अपने संक्रमण काल में पहुँच गया है। टिप्पणी का अधिकार बड़ों को ही रहता है, अनुभव से भी और आयु से भी। श्रीमतीजी की टिप्पणियों में एक व्यंग रहता है और एक आग्रह भी। बच्चों की टिप्पणी यदि आपको प्राप्त होने लगे तो समझ लीजिये कि वे समझदार भी हो गये और आप पर अधिकार भी समझने लगे। उनकी टिप्पणी में क्या रहता है, उदाहरण आप स्वयं देख लीजिये।
हम भी समझाने में सक्षम हैं
बिटिया कहती हैं कि आप पृथु भैया को को ठीक से डाँटते नहीं हैं। जब समझाना होता है, तब कुछ नहीं बोलते हो। जब डाँटना होता है, तब समझाने लगते हो। जब ढंग से डाँटना होता है, तब हल्के से डाँटते हो और जब पिटाई करनी होती है तो डाँटते हो। ऐसे करते रहेंगे तो वह और बिगड़ जायेगा। हे भगवान, दस साल की बिटिया और दादी अम्मा सा अवलोकन। क्या करें, कुछ नहीं बोल पाये, सोचने लगे कि सच ही तो बोल रही है बिटिया। अब उसे कैसे बतायें कि हम ऐसा क्यों करते हैं? अभी तो प्रश्न पर ही अचम्भित हैं, थोड़ी और बड़ी होगी तो समझाया जायेगा, विस्तार से। उसके अवलोकन और सलाह को सर हिला कर स्वीकार कर लेते हैं।
पृथु कहते हैं कि आप इतना लिखते क्यों हो, इतना समय ब्लॉगिंग में क्यों देते हो? आपको लगता नहीं कि आप समय व्यर्थ कर रहे हो, इससे आपको क्या मिलता है? थोड़ा और खेला कीजिये, नहीं तो बैठे बैठे मोटे हो जायेंगे। चेहरे पर मुस्कान भी आती है और मन में अभिमान भी। मुस्कान इसलिये कि इतना सपाट प्रश्न तो मैं स्वयं से भी कभी नहीं पूछ पाया और अभिमान इसलिये कि अधिकारपूर्ण अभिव्यक्ति का लक्ष्य आपका स्वास्थ्य ही है और वह आपका पुत्र बोल रहा है।
हमें भी गम्भीरता से लें
ऐसा कदापि नहीं है कि यह एक अवलोकन मात्र है। यदि उन्हे मेरी ब्लॉगिंग के ऊपर दस मिनट बोलने को कहा जाये तो वह उतने समय में सारे भेद खोल देंगे। पोस्ट छपने के एक दिन पहले तक यदि पोस्ट नहीं लिख पाया हूँ तो वह उन्हें पता चल जाता है। यदि अधिक व्यग्रता और व्यस्तता दिखती है तो कोई पुरानी कविता पोस्ट कर देने की सलाह भी दे देते हैं, पृथुजी। लगता है कि कहीं भविष्य में मेरे लेखन की विवेचना और समीक्षा न करने लगें श्रीमानजी।
आजकल हम पर ध्यान थोड़ा कम है, माताजी और पिताजी घर आये हैं, दोनों की उत्सुकता के घेरे में इस समय दादा दादी हैं। न केवल उनसे उनके बारे में जाना जा रहा है, वरन हमारे बचपन के भी कच्चे चिट्ठे उगलवाये जा रहे हैं। कौन अधिक खेलता था, कौन अधिक पढ़ता था, कौन किससे लड़ता था, आदि आदि। मुझे ज्ञात है कि इन दो पीढ़ियों का बतियाना किसी दिन मुझे भारी पड़ने वाला है। माताजी और पिताजी भले ही बचपन में मुझे डाँटने आदि से बचते रहे, पर मेरे व्यवहार रहस्य बच्चों को बता कर कुछ न कुछ भविष्य के लिये अवश्य ही छोड़े जा रहे हैं।
कई बच्चे अपने माता पिता को अपना आदर्श मानते हैं, उनकी तरह बनना चाहते हैं। पर जब उनके अन्दर यह भाव आ जाये कि उन्हे थोड़ा और सुधारा जा सकता है, थोड़ा और सिखाया जा सकता है तो वे अपने आदर्शों को परिवर्धित करने की स्थिति में पहुँच गये हैं। उनके अन्दर वह क्षमता व बोध आ गया है जो वातावरण को अपने अनुसार ढालने में सक्षम है। समय आ गया है कि उन्होंने अपनी राहों की प्रारम्भिक रूपरेखा रचने का कार्य भलीभाँति समझ लिया है।
पता नहीं कि हम कितना और सुधरेंगे या सँवरेंगे, पर जब बच्चे सिखाते हैं तब बहुत अच्छा लगता है।
Wednesday, 22 May 2013
भीषण गर्मी और जाम
देश की राजधानी दिल्ली हमेशा गुलिस्तान होती है मगर कभी कभार परेशान होती है। इन दिनों दिलवालों की दिलदार दिल्ली जानलेवा गर्मी और जाम से परेशान है। दूसरे शब्दों में कहें तो `एक करेला दूसरा नीम' चढ़ा वाली हालत बनी हुई है। बढ़ता, चढ़ता हुआ पारा सभी को बेचारा बना रहा है। मई में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस पहुंच रहा है, आने वाले दिनों में क्या होगा? गर्मी अपने पूरे शबाब पर है और गर्मी कोई नरमी भी नहीं दिखा रही। गर्मी से बदहाल होने का एक कारण यह भी है कि सड़कों पर लाखों एसी कारें और सैकड़ों एसी बसें दौड़ती हैं। इन वाहनों से बाहर निकल रही गर्मी भी तो परेशानी बढ़ा रही है।
इस बीच सड़कों पर कई कारणों से लंबा जाम लगता है। किसी ने बिल्कुल सही कहा कि दिल्ली तेज लू और ली से दिक्कतें झेल रही है। लू से तो आप सभी वाकिफ हैं मगर ली ने भी तो जान ले ली है। ली यानी पड़ोसी देश के पधानमंत्री। ये जनाब तीन दिन के लिए दिल्ली यात्रा पर आए हैं और इनकी सुरक्षा को देखते हुए कई सड़कें और मेट्रो स्टेशन बंद किए गए और जाम का अंजाम यह हुआ कि दिल्ली ठहर गई। लू की वजह से पसीने में तर बतर दिल्ली की जाम में सांसें अटकने लगीं। इसके अलावा आईपीएल के मैच से भी जाम लगता है। दिल्ली गर्मी और जाम से राहत चाहती है मगर यह राहत देना किसी के हाथ में नहीं। बादल दिखाई देंगे तो राहत की उम्मीद भी होगी।
उत्तर पदेश में पिछली सरकार ने पार्कों में थोक में मूर्तियां और हाथी लगवाए। कहते हैं इस मामले में 1400 करोड़ रुपए बहा दिए गए। अब पदेश के लोकायुक्त ने यह रकम दो पूर्व मंत्रियों से वसूलने के आदेश दिए हैं। कमाल यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री को बेगुनाह माना गया है।
यूएई यानी सउदी अरब में शानदार बुनियादी ढांचा बनाने में भारत के कामगारों का बड़ा हाथ है। अब वहां एक कानून बनाकर केवल उसी देश के लोगों को काम देने का हुक्म दिया गया है। जितनी हिम्मत, कुब्बत और कौशल हिन्दुस्तानियों में है उतना किसी और मुल्क के लोगों में कहां। बहरहाल 60 हजार भारतीय कामगारों को खतरा है मगर वहां के लोग तो बने बनाए बुनियादी ढांचे का शायद रख रखाव भी कर नहीं पाएंगे।
Monday, 15 April 2013
हमारी मौत के बाद तुम, देशी घी के दिये जला लेना..!
हमारी मौत पर तुम
देशी घी के दिये जला लेना,
तुम्हे मुक्ति मिल जाएगी
निर्भीक - निष्पक्ष कलम से
हमें मुक्ति मिल जायेगी
कर्मयोग के दायित्व से ।
मुझे ज्ञात है मित्र
तुम मेरे दोस्त हो,
पैसे की हवस ने तुम्हे
धृतराष्ट्र बना दिया है
सच्चा कलम का सिपाही
तेरे रास्ते में आ खड़ा हो गया है।
तुम लाचार हो, विवश हो, अंधे हो चुके हो..
पता नही तुम्हें, तुम क्या कर रहे हो,
अत्याचार, दोहन, शोषण, राष्ट्र के साथ..
गद्दारी, तुम्हारे खून में समां चूका है
वफ़ादारी, देश भक्ति, हमें विरासत में मिला है।
क्या करूं! ईश्वर ने हमें कलम दिया है,
न लिख पाया, सत्यमेव जयते तो,
रब को कैसे मुंह दिखाऊंगा,
तुम रूठ गये तो भी वक्त कट जायेगा,
ईश्वर रूठ गया तो, मुक्ति कैसे पाउँगा ।
हे मित्र! मुझे सत्य के पथ पर चलने दो
हमारी मौत के बाद तुम,
देशी घी के दिये जला लेना, देशी घी के दिये जला लेना .....!
देशी घी के दिये जला लेना,
तुम्हे मुक्ति मिल जाएगी
निर्भीक - निष्पक्ष कलम से
हमें मुक्ति मिल जायेगी
कर्मयोग के दायित्व से ।
मुझे ज्ञात है मित्र
तुम मेरे दोस्त हो,
पैसे की हवस ने तुम्हे
धृतराष्ट्र बना दिया है
सच्चा कलम का सिपाही
तेरे रास्ते में आ खड़ा हो गया है।
तुम लाचार हो, विवश हो, अंधे हो चुके हो..
पता नही तुम्हें, तुम क्या कर रहे हो,
अत्याचार, दोहन, शोषण, राष्ट्र के साथ..
गद्दारी, तुम्हारे खून में समां चूका है
वफ़ादारी, देश भक्ति, हमें विरासत में मिला है।
क्या करूं! ईश्वर ने हमें कलम दिया है,
न लिख पाया, सत्यमेव जयते तो,
रब को कैसे मुंह दिखाऊंगा,
तुम रूठ गये तो भी वक्त कट जायेगा,
ईश्वर रूठ गया तो, मुक्ति कैसे पाउँगा ।
हे मित्र! मुझे सत्य के पथ पर चलने दो
हमारी मौत के बाद तुम,
देशी घी के दिये जला लेना, देशी घी के दिये जला लेना .....!
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